Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation

  • -- Pali is a Sweet, Beautiful and Easy language. -- अहं वदामि पालिभासं. -- Pali is my Pride. --

Friday, 1 May 2020

On May 01, 2020 by Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation   No comments
पालि और धम्म सम्बन्धी महत्वपूर्ण लिंक
(Important Links about Pali and Dhamma)



Vipassana  Research Institute



Pali Wikipedia



Pali Text Society



A basic Pāli language textbook (free) in Unicode PDF format



Resources for reading & writing Pāli in indigenous scripts: Burmese, Sri Lankan, & Cambodian





Pāli-English dictionary



Complete Pāli Canon in romanized Pali and Sinhala, mostly also in English translation



Pāli Canon selection



A guide to learning the Pāli language



"Pali Primer" by Lily De Silva (requires installation of special fonts)



"Pali Primer" by Lily De Silva (UTF-8 encoded)



Free/Public-Domain Elementary Pāli Course--PDF format




Free/Public-Domain Pāli Grammar (in PDF file)




Yahoo discussion group on Pāli





Geocities discussion group on Pāli (homepage)



Comprehensive list of Pāli texts on Wikisource



Buddhist Dictionary of Pāli Proper Names



Pāli Text Reader (software)



Jain Scriptures



Pali Vocabulary Quiz





VRI-Pali Study programmes









Tuesday, 28 April 2020

On April 28, 2020 by Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation   No comments
पालि सीखों टेलीग्राम से 
(Learn Pali through Telegram)

अब आप घर बैठे पालि भाषा सीख सकते हैं. Virtual Learning या Online Learning के अंतर्गत अब आप टेलीग्राम एप्प के द्वारा पालि शिक्षण आरम्भ हो रहा है. इस हेतु भदन्ताचार्य बुद्धदत्त पालि संवर्धन प्रतिष्ठान (Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation) द्वारा "पालि संवर्धन प्रतिष्ठान (Pali Promotion Foundation)" नामक ग्रुप आरम्भ किया जा रहा है. टेलीग्राम एप्प को Download करके नीचे दी गई लिंक के माध्यम से आप इस ग्रुप से जुड़कर आप निश्शुल्क पालि सीख सकते हैं.

पालि एक सरल भाषा है. ऑनलाइन पालि शिक्षण के माध्यम से आप घर में रहते हुए अपनी ऊर्जा का सदुपयोग करते हुए पालि का नया ज्ञान अर्जित कर सकते हैं या अपने ज्ञान को परिपक्व कर सकते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इस वर्चुअल या ऑनलाइन पालि शिक्षण का क्रम शुरू किया जा रहा है। आप 2-3 माह में अवश्य ही पालि में परिपूर्ण ज्ञान अर्जित कर पायेंगे। इस हेतु आपसे मेरी केवल एक ही गुजारिश है और इसके लिए सबसे आवश्यक भी है, वह है--धैर्य। आप धैर्य धारण करते हुए धीरे-धीरे पालि का अध्ययन शुरू करें और शीघ्र ही निम्नोक्त विषयों को जान पायेंगे तथा लाभान्वित होंगे-

- आप 20,000 से अधिक नवीन पालि के शब्द तथा उनका अर्थ को जान पायेंगे।
- 20,000 से अधिक नवीन पालि शब्दों का सभी विभक्तियों में शुद्ध और समुचित प्रयोग करने में सक्षम हो जायेंगे।
- पालि व्याकरण तथा भाषा-विज्ञान की बारीकियों और प्रयोग से सुपरिचित तथा दक्षता प्राप्त कर पायेंगे।
- 200 से अधिक धातुओं (क्रियापदों) का विविध कालों में सहजता और सरलता से प्रयोग करने में समर्थ हो जायेंगे।
- 10,000 से अधिक पालि वाक्यों को स्वयं बना पायेंगे और इसके पश्चात अनेक वाक्यों का निर्माण कर पायेंगे।
- पालि वन्दना, परित्त-पाठ तथा प्रातःकालीन वन्दना में संगायित गाथाओं या सुत्तों का बिना किसी अनुवाद के सीधे समझने में दक्षता प्राप्त कर लेंगे।
- पालि-भाषा में बातचीत कर पायेंगे तथा अपने मनोभावों और भावनाओं को प्रभावी तरीके से अभिव्यक्त करने में सक्षम हो सकेंगे।

किन्तु उक्त में सबसे बड़ा लाभ आपका ये होगा कि आप भगवान् बुद्ध की कल्याणकारी शिक्षाओं को समझने हेतु पालि-शिक्षण का एक मार्ग प्राप्त कर लेंगे। इसी प्रकार धीरे-धीरे कार्य करते रहे, तो आप पालि भाषा तथा परियत्ति मार्ग में आगे बढ़ पायेंगे।

भगवान् बुद्ध के वचनों का रक्षण-पोषण करने के कारण इस भाषा को ‘पालि’ कहा जाता है। इसी कारण यह उनके वचनों की मां है। इस मायने यह हमारी भी मां है। इसकी रक्षा और पालन-पोषण हमारी सबकी संयुक्त जिम्मेदारी है। अतः हमें पालि का शिक्षण, प्रचार-प्रसार, अनुसन्धान और संवर्धन अवश्य ही करना चाहिए।

आपको टेलीग्राम के माध्यम से स्वयं शिक्षण-सामग्री (Self Learning Materials) के रूप में लिखित पाठ भेजे जायेंगे तथा इनके साथ Live Facebook या You tube Videos के Links भी भेजे जायेंगे. आप इनको देखकर भी सीखेंगे. शिक्षण-सामग्री के रूप में आपको चित्र, रेखाचित्र, वाक्यमाला, पीडीएफ फाईल्स भी प्रेषित की जायेंगी.

मेरा लक्ष्य आपसे संवाद स्थापित करते हुए पालि सीखाना है। अतः आपको ग्रुप में अपने अभ्यास को लिखकर Share करना होगा. आप धैर्य तथा समझदारी का परिचय देते हुए पालि सीखें.
हम यहाँ केवल पालि-भाषा का शिक्षण प्रदान करेंगे। इस शिक्षण के दौरान न तो पालि-साहित्य का इतिहास पढ़ाया जायेगा, ना ही इसकी प्राचीनता-नवीनता के चर्चे होंगे। इसमें दार्शनिक चर्चा भी नहीं होगी। अतः आप केवल और केवल पालि के व्याकरणांशों को सीखने का धैर्यपूर्वक प्रयास करें, पालि-भाषा सीखें और इसे दूसरों तक भी पहुँचायें।

सफलता मिलेगी ही...

आपका
- डॉ. प्रफुल्ल गड़पाल
8126485505


https://t.me/joinchat/MzrZlBvkNA4riQMo-hksKw



Pali Learning through Telegram App

Saturday, 25 April 2020

On April 25, 2020 by Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation   1 comment























On April 25, 2020 by Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation   No comments
पालि शिक्षण चैनल

https://www.youtube.com/channel/UCmuV4uBdNsiZe8NbfnfdMoA
On April 25, 2020 by Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation   No comments
पालि कार्यक्रमों का आयोजन-
8.1 धम्मपदुस्सवो (धम्मपदोत्सव) का आयोजन करनाµभदन्ताचार्य बुद्धदत्त पालि संवर्धन प्रतिष्ठान तथा इससे सम्बद्ध सभी जिला तथा तहसील ईकाइयों द्वारा फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर प्रतिवर्ष ‘धम्मपदोत्सव’ का आयोजन किया जायेगा। ‘धम्मपद’ बौद्धधम्म का एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसे धम्म का प्रतिनिधि ग्रन्थ माना जाता है। विश्व की लगभग समस्त महत्त्वपूर्ण भाषाओं में इसका अनुवाद किया जा चुका है। सम्पूर्ण विश्व में इस ग्रन्थ के प्रति अत्यन्त सम्मान तथा श्रद्धाभाव है। अतः धम्मपद के इस महत्त्व को दृष्टिगत रखते हुए ‘धम्मपदोत्सव’ के अवसर पर धम्मपद का वाचन तथा इसके विविध पहलुओं पर गहन परिचर्चा तथा संगोष्ठियाँ आयोजित की जा सकती है। इस दिन छात्रा-छात्राओं हेतु धम्मपद के विषय में विविध-प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जा सकती हैं।
8.2 अन्तर्राष्ट्रीय-पालि दिवस (प्दजमतदंजपवदंस च्ंसप क्ंल) का आयोजन करनाµभदन्ताचार्य बुद्धदत्त पालि संवर्धन प्रतिष्ठान द्वारा भारत में बौद्ध-धम्म के पुनर्जागरण में श्रेष्ठ भूमिका निभाने वाले तथा अनेक पालि ग्रन्थों के लेखक तिपिटकाचार्य भदन्त धम्मरक्खित जी की जयन्ती के अवसर पर 1 अपै्रल को प्रतिवर्ष ‘अन्तर्राष्ट्रीय-पालि दिवस’ का आयोजन संस्थान के द्वारा किया जायेगा।
8.3 विशिष्ट पालि सेवा सम्मान प्रदान करनाµपालि भाषा के उन्नयन तथा विकास के लिए कार्य करने वाले मनीषियों के लिए संस्थान के द्वारा प्रतिवर्ष 3 (तीन) पुरस्कार प्रदान किये जाने चाहिए। पुरस्कारों का विवरण इस प्रकार हो सकता हैµ
(1) पालि के संवर्धन में ताउम्र महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करने वाले एक वरिष्ठ (60 वर्ष से अधिक उम्र वाले) भारतीय विद्वान्,
(2) पालि-क्षेत्रा में महत्त्वपूर्ण योगदान, शोध तथा प्रचार-प्रसार में योगदान करने वाले एक युवा (30 से 40 वर्ष की उम्र वाले) भारतीय विद्वान् तथा
(3) अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पालि भाषा के उन्नयन, शोध तथा प्रचार-प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान करने वाले (50 वर्ष से अधिक उम्र वाले) अन्तर्राष्ट्रीय विद्वान्।
संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष ‘अन्तर्राष्ट्रीय पालि दिवस’ (प्दजमतदंजपवदंस च्ंसप क्ंल) के अवसर पर उक्त प्रकार से पालि-क्षेत्रा में विशिष्ट भूमिका निभाने वाले तीन विद्वानां को सम्मानित किया जा सकता है। इस हेतु प्रशस्ति पत्रा, शाॅल तथा नकद राशि भी उन्हें प्रदान की जा सकती है।
8.4 पालि पखवाड़े (च्ंसप वितजदपहीज) का आयोजन करनाµपालि-पखवाड़े का आयोजन पालि के प्रचार-प्रसार तथा संवर्धन में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर सकता है। अतः प्रतिवर्ष देवमित्त अनागारिक धम्मपाल की जयन्ती के अवसर पर 17 सितम्बर को ‘विस्स-पालि-भासा-गारव-दिवसो’ (विश्व पालि-भाषा गौरव दिवस) से आरम्भ कर पालि पखवाड़े का आयोजन किया जा सकता है। यह पालि पखवाड़ा प्रतिवर्ष दिनाँक 17 सितम्बर से 1 अक्टूबर तक आयोजित किया जा सकता है। संस्थान अपने स्तर पर पालि पखवाड़े को आयोजित करने के लिए लोगों तथा सामाजिक संस्थाओं को अभिप्रेरित भी कर सकता है।
8.5 पालि स्पर्धाओं (च्ंसप ब्वउचमजपजपवदे) का आयोजन करनाµसंस्थान के द्वारा प्रतिवर्ष अक्टूबर-नवम्बर माह में पालि स्पर्धाओं का आयोजन किया जा सकता है। इस हेतु राष्ट्र-स्तर पर चार स्तरों (कक्षा 6-8, कक्षा 9-12, स्नातक तथा स्नातकोत्तर) पर तिपिटक के ग्रन्थों के पाठ्यों का स्मरण-शक्ति के आधार पर कण्ठपाठ-स्पर्धा, भाषण-स्पर्धा तथा व्याख्या-स्पर्धाएँ कराई जा सकती हैं। इन स्पर्धाओं में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पाने वाले विजेताओं को स्वर्ण-पदक, रजत पदक तथा कांस्य पदक सहित क्रमशः रू. 20,000, रू.15,000 तथा रू. 10,000 से सम्मानित किया जा सकता है। इन स्पर्धाओं के आयोजन से पालि भाषा शीघ्र ही युवाओं तथा बच्चों का प्रिय विषय बन जायेगा तथा पालि में उपस्थित नैतिक-शिक्षा से उन्हें जीवन में करणीय-अकरणीय का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
8.6 पालि नाट्य-महोत्सव (च्ंसप क्तंउं थ्मेजपअंस) का आयोजन करनाµमनुष्य स्वभावतः उत्सव तथा मनोरंजन के साधनों के प्रति आरम्भ से ही आकर्षित रहा है। मनोरंजन के साधनों में साहित्य तथा कला ने अपना एक विशेष स्थान बनाया हुआ है। साहित्य तथा कला के द्वारा मनुष्य का न केवल मनोरंजन ही होता है, अपितु वह इससे सुन्दर ढंग से शिक्षा भी प्राप्त करता है। इस तरह साहित्य मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा का भी उत्तम स्रोत है।
साहित्य में नाट्य-विधा एक महत्त्वपूर्ण विधा है। साहित्य की समस्त विधाओं का आनन्द हम उसे पढ़कर या सुनकर ही ले सकते हैं, किन्तु नाट्य-विधा में हम उसे देख भी सकते हैं। इस प्रकार नाट्य या नाटक देखे व सुने जा सकते हैं। प्रायः देखे हुए दृश्यों की मानव-हृदय पर अमिट छाप पड़ जाती है। अतः पालि साहित्य में भी ऐसे नाट्य-प्रयोग किये जा सकते हैं।
पालि साहित्य में एक प्रकार से ऐसे प्रयोग सर्वथा नवीन ही होंगे, क्योंकि मूल पालि साहित्य में कोई नाटक उपलब्ध नहीं होता। हाँ, नाटकीयता लिए ही अनेक प्रसंग यहाँ अवश्य प्राप्त होते हैं। जो हो, आधुनिक समय में पालि में नाटक लिखे तथा मंचित किये जा सकते हैं तथा उनके व्यवसायिक प्रयोग भी किये जा सकते हैं। अतः संस्थान के द्वारा प्रतिवर्ष पृथक्-पृथक् नगरों में तीन दिवसीय ‘पालि नाट्य-महोत्सव’ के आयोजन की संकल्पना की जानी चाहिए। इस प्रयोग से संस्थान की ख्याति देश-विदेश में प्रसारित होगी। यह कार्यक्रम नवम्बर माह में किया जायेगा।
8.7 विशिष्ट पालि व्याख्यानमाला (ैचमबपंस समबजनतम ेमतपमे वद च्ंसप) का आयोजन करनाµसंस्थान के द्वारा प्रतिवर्ष किसी विशेष अवसर पर पालि के वरिष्ठ विद्वान् द्वारा संस्थान परिसर में विशिष्ट पालि व्याख्यानमाला का आयोजन कराया जा सकता है। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न नगरों में विशिष्ट पालि व्याख्यानमाला के आयोजन किये जा सकते हैं अथवा आयोजन के लिए विभिन्न संस्थाओं को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा सकती है। यह कार्यक्रम जनवरी-फरवरी माह में किया जायेगा।

On April 25, 2020 by Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation   2 comments
धम्म-पालि-शिक्षक-प्रशिक्षण-अध्ययनशालाओं का समायोजन-
पालि भाषा को जन-जन में प्रचारित-प्रसारित करने के लिए पालि के कुशल शिक्षक एवं प्रशिक्षक तैयार करना परम आवश्यक है। ये प्रशिक्षक ही मुख्यतः गाँव-गाँव, नगर-नगर पहुंचकर अथवा अपने-अपने स्थानों में पालि का अध्यापन करेंगे। अतः ऐसे पालि के शिक्षक-प्रशिक्षक तैयार करने के लिए भदन्ताचार्य बुद्धदत्त पालि संवर्धन प्रतिष्ठान के द्वारा ‘धम्म-पालि शिक्षक-प्रशिक्षण-अध्ययनशाला’ का आयोजन किया जायेगा। इन अध्ययनशालाओं में प्रशिक्षित अध्येताओं को ‘धम्मपालि शिक्षक’ के नाम से जाना जायेगा। इन प्रशिक्षित शिक्षकों-प्रशिक्षकों को रोजगार प्रदान करने की दृष्टि से भी विस्तृत तथा सुदृढ़ कार्ययोजना बनाते हुए विविध स्थानों या पालि-सम्भासन-सालाओं में सम्प्रेषित किया जायेगा। पालि शिक्षण-प्रशिक्षण को यदि रोजगार से जोड़ा जायेगा, तो निश्चित रूप से इस दिशा में बड़ी सफलता प्राप्त हो सकती है।
On April 25, 2020 by Bhadantacharya Buddhadatta Pali Promotion Foundation   No comments
विहारों को शिक्षा के केन्द्र के रूप में विकसित करना

भदन्ताचार्य बुद्धदत्त पालि संवर्धन प्रतिष्ठान गांव-गांव, नगर-नगर ऐसे सभी बुद्ध-विहारों को शिक्षा के केन्द्र के रूप में विकसित करना चाहता है, जहां किसी प्रकार की कोई शैक्षणिक गतिविधि या कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं। क्योंकि बिना शिक्षा के विहारों का कोई विशेष महत्त्व नहीं। विहार यदि शिक्षा से अछूते रहकर केवल पूजा-अर्चना के स्थल बनें रहे, तो ऐसे विहार कर्मकाण्ड के निष्प्राण स्थान ही होंगे। ऐसे विहारों का समाज को बहुत अधिक लाभ नहीं मिल पायेगा। अतः बुद्ध-विहारों में शिक्षा तथा संस्कृति निर्माण से सम्बद्ध गतिविधियों का आयोजन अवश्य ही किया जाना चाहिए।

इस कारण बुद्ध-विहार समाज के लिए (विशेषतः बच्चों के लिए) शिक्षा के केन्द्र-स्थल बनना चाहिए। यदि विहारों का शिक्षाकरण होगा, तो भगवान् बुद्ध की नैतिकता, शील-सदाचार तथा हित-सुख की शिक्षाएँ तथा बाबासाहब डाॅ. आंबेडकर का चिन्तन समाज में समुचित परिप्रेक्ष्य तथा सकारात्मक ढंग से पहुँचाया जा सकेगा। आज नई पीढ़ी को बुद्ध-मार्ग के अनुरूप शिक्षा दी जाये, तो समाज अतीव तीव्रता से विकास कर सकता है। भगवान् तथागत बुद्ध की शिक्षा सार्वकालिक, सार्वभौमिक तथा सार्वजनीन है; इसी कारण प्राणि-मात्र के लिए समानतया कल्याण-कारक है। मानवतावादी तथा वैज्ञानिकता भगवान् की शिक्षा की महत्त्वपूर्ण विशेषता है। इसमें प्रचलित धर्म, पन्थ, मत-मतान्तर या सम्प्रदायों के लिए कोई स्थान नहीं, ना ही इसमें कोई जाति-भेद या अन्य कोई भेद विद्यमान है। अतः प्रत्येक वर्ग के व्यक्ति को निःस्वार्थ भाव से धम्म की शिक्षा वितरित की जानी चाहिए।

भदन्ताचार्य बुद्धदत्त पालि संवर्धन प्रतिष्ठान भिक्खुओं के माध्यम से ही विहारों में निवाररत भिक्खुओं को पालि आदि का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इससे भिक्खु समधिक शिक्षित, ज्ञान-सम्पन्न तथा तकनीकी ज्ञान से परिपूर्ण होंगे, जिससे निश्चय ही विश्व के बौद्ध-समुदाय के साथ हम भी कदम-ताल मिला पायेंगे। आज बुद्ध-आंबेडकर के अन्ध-भक्तों की अपेक्षा प्रज्ञावान् भिक्खुओं व अनुयायियों की कई अधिक आवश्यकता है। ज्ञान-सम्पन्न भिक्खुओं और समाज के शिक्षित युवाओं द्वारा विहारों के माध्यम से पालि के साथ-साथ कम्प्युटर-टाइपिंग, पत्राकारिता, राजनीति, समाजदर्शन, अध्यात्म तथा अंग्रेजी जैसे तमाम समसामयिक और प्राचीन तथा तकनीकी विषयों का अध्यापन किया जाना चाहिए। आधुनिक काल के अनुरूप प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए भी विहारों में कक्षाएँ आयोजित की जा सकती है।